सफ़ेद चादर तान कर ,
मैं किसके सपनो में खो गया था
अदाओ मैं उसकी ,
मैं कुछ ऐसे बह गया था
सफ़ेद चादर तान कर ,
मैं किसके सपनो में खो गया था...
कल मैंने उसको पहली बार देखा था ,
कुछ अंजानो से चेहरों में,
वो मुस्कराता हुआ चेहरा उसका था
मंद मंद मुस्कान उसकी
अन्तरमन को कुछ ऐसे छु गयी
हर पल तस्वीर उसकी ,
मैं बना रहा हू
सफ़ेद चादर तान कर ,मैं किसके सपनो में खो गया था...
वो कातिल निगाहे उसकी थी
जिनहोने ने सरे आम लूटा चैन मेरा
सनसनी सी दौढ़ गयी थी तन मनं में
जब पहली बार -- वार उसकी नजरौ का हुआ
उन दो पल में उसने मुझ पर,
कैसा जालिम सा कहर ढाया
क़ि सफ़ेद चादर तान कर ,
मैं अब उसके सपनो में खो गया ...
मन ही मन बेकरार होता ,
बस उससे अबफिर मिलने को
पकड़ के दामन ,
दिल की बात -- कह दूंगा उस से
लौटा दो वो सुख चैन मेरा ,
जो तुम्हारी आखो ने -- मुझसे छीन लिया
पल पल दिखती हैं मुस्कान तेरी ,
जिस पर प्रफुल्लित हो जाता -- मन मेरा
पल पल में सपनो में तेरे ,
खोता रहता हर जगह
सफ़ेद चादर तान कर ,
मैं किसके सपनो में खो गया था...
विचारौ की अनगिनत लहरों का ,
तुम ही तू एक किनारा हो ..
हर पल दिल यह कहता मुझसे
सो जाओ मैं -- तुम्हारे सपनो की सेज पर
भूल जाओ मैं सब कुछ ,
बस खो जाओ मैं बस - तेरी तस्वीरो में
बस अब सपनो में तेरे ,
खोने को जी करता है
सफ़ेद चादर तान कर ,
मैं किस के सपनो में खो गया ...
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Atevery juncture of our life we used to hope for somebody's assistance ,love or any cooperation . i also waiting for someone who is really close to me in my inspiration ,my action .
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Saturday, October 23, 2010
Sunday, February 17, 2008
उड़ान
इस कविता के माध्यम से मे उस कमजोर वर्ग का उत्साह वर्धन करना चाहता हू ,जो मानसिक अथवा शारारिक रूप से विकृत है ,जिन्हें उनके कमजोर होने का हर बार एहसास कराया जाता है ,और इस से निराश हो कर वोह जिंदगी से हार मान लेते है | इस कविता में एक पक्षी का उदाहरण दिया गया है जो अपने पंख कट जाने पर भी आसमा छूने का विश्वास रखता है |
अहंकारी समाज जिसे एक मनुष्य से प्रदर्शित क्या गया है ,वो कमजोर पक्षी का उपहास उड़ाते हुए कहता हैं
कट जायेंगे पंख तुम्हारे
जिन पर तुझको नाज है
मत भूल ! तू है एक मात्र परिंदा |
बिन पंखो के क्या काज है
लेते उड़ान उस नभ की
जहा साथी संघ का साथ है
कट जायेंगे पंख तुम्हारे
फिर तेरी क्या आस है
फिर तेरी क्या आस है ---है
पक्षी बड़े ही आत्मविश्वास के साथ मनुष्य को उत्तर देता हुए कहता :
कट जायेंगे पंख हमारे
फिर भी कुछ करने की प्यास
नभ छूने की आस है
उड़ने का विश्वाश है
उड़ान पंखो से नही तेरी
तेरी इछाशक्ति का अभ्यास है
मत भूलो ! ऐ मानव तू भी
सम्भव सब कुछ है
जब तक तुझ में आस है
छुलेगे आसमा को भी
यदि द्रयन्य निश्चय
और आत्मविस्वास है
इरादों ने बदली दुनिया
कह रहा इतिहास है
कट जायेंगे पंख हमारे
फ़िर भी कुछ करने की आस है
नभ छूने की प्याश है
कुछ नया करने का विश्वाश है
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